पता नहीं क्यों मैं तुम्हें भूल नही पाती।
पता नहीं क्यों तेरी बातें कभी खत्म ही नहीं होती
ना जाने क्यों तेरी याद मेरा साथ नहीं छोड़ती
पता नहीं क्यो तेरा नाम अभी भी मेरे चहरे पे मुस्कुराहट ले आता है ,
और पता नहीं क्यो मैं तुझे भूल नहीं पाती।
तेरी हसी आज भी मेरे कानो मैं गुंजती है,
तेरा नाम आज भी मुझे बोलते-बोलते चुप करा देता है
ना जाने क्यों तेरी मुस्कुराहट आज भी मेरा दिल धड़का देती हैं
और पता नहीं क्यो तेरा ख़्याल मेरी नींदे उड़ा जाता है।
लेकिन अब पता नहीं क्यों हालत कुछ बदलते जा रहे है ,
तुम्हारी यादें मेरी नींदे उड़ा रही है ,
तुम्हारा मेरे पास ना होना मुझे पागल सा करता जा रहा है ,
तुम्हारी आवाज़ सुनने से मेरी रूह काप उठ रही है ,
और तुम्हारा नाम अब आखें म केर देता है ,
और फिर भी पता नहीं क्यों
मैं तुम्हें भूल नहीं पाती।।
-गामिनी आर्य

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